भगवान श्रीकृष्ण के जन्म लेने से पहले योगमाया ने क्या किया


 पौराणिक कथाओं के अनुसार द्वापर युग में कंस अपने पिता को कारागार में डाल दिया और खुद मथुरा का राजा बन गया कंस की एक चचेरी बहन देवकी थी जब कंस अपनी  नवविवाहिता बहन देवकी को और उनके पति वसुदेव को रथ में उनके घर ले जा रहा था, उसी समय उसने एक आकाशवाणी सुनी, जिसमें यह भविष्यवाणी की गई थी कि देवकी का आठवां पुत्र उसका संहार करेगा।

क्रूर कंस ने तुरन्त ही देवकी को मारने के लिए अपनी तलवार निकाली, 

वसुदेव कंस से बोले देवकी को मत मारिए देवकी जब पुत्र को जन्म देगी तो मैं तुरन्त उसके पुत्र को आपके पास ले आऊंगा कंस ने देवकी और वसुदेव को कारागार में डाल दिया कंस ने देवकी के 6 पुत्रों को जन्म लेते ही मार दिया देवकी जब सातवीं बार गर्भवती हुई तब श्रीभागवन योगमाया से बोले देवकी और वसुदेव कंस के कारागार में बंदी हैं और इस समय मेरा पूर्ण अंश, शेष, देवकी के गर्भ में है। तुम शेष को देवकी के गर्भ से रोहणी के गर्भ में स्थानांतरित कर सकती हो उसके बाद मैं समस्त शक्तियों के सहित स्वयं देवकी के गर्भ में अवतरित होने जा रहा हूं फ़िर मैं देवकी और वसुदेव के पुत्र के रूप में प्रगट होऊंगा। तब तुम गोकुल में नन्द यशोदा की पुत्री के रूप में प्रगट होना संसार के सभी लोग तुम्हारी पूजा करेंगे 

योगमाया श्रीभगवान की प्रमुख शक्ति है। वेदों में कहा गया है कि श्री भगवान की अनेक शक्तियां हैं ये विभिन्न शक्तियां बाहर और भीतर से काम कर रही हैं 

योगमाया श्रीभगवान की आज्ञानुसार शेष को देवकी के गर्भ से रोहणी के गर्भ में स्थानांतरित किया देवकी और वसुदेव उस समय योगमाया के वश में थे जिसे योगनिद्रा कहते हैं जब ऐसा हो चुका, तो लोगों ने समझा कि देवकी का सातवां गर्भ नष्ट हो गया इस तरह बलराम देवकी के पुत्र के रूप में अवतरित हुए, किंतु रोहणी के गर्भ में स्थानांतरित किए जाने के कारण रोहणी के पुत्र कहलाए 

प्रभु की इच्छा से योगमाया ने देवकी के उस गर्भ को रोहणी के पेट में स्थापित कर दिया रोहणी वसुदेव की पहली पत्नी थी जो कंस के भय से गोकुल में नंदजी के यहां रहती थी देवताओं ने अदृश्य रहकर कंस के महल में स्थित कारागार में प्रवेश किया और प्रार्थना की हे माता देवकी आपकी कोख में पूर्ण पुरूषोतम भगवान विद्दमान हैं 

योगमाया समस्त शक्तियों में प्रमुख हैं।भगवान श्रीकृष्ण और योगमाया भाई तथा बहन परम शक्तिमान तथा परम शक्ति रूप में प्रगट हुए भगवान श्रीकृष्ण परम शक्तिमान है और भौतिक जगत में मां दुर्गा परम शक्ति है 

चतुर्भुज श्रीविष्णु नारायणा के रूप में प्रगट हुए और देवकी वसुदेव को दर्शन दिए दर्शन देने के बाद श्रीविष्णु बाल रूप धारण किए और वसुदेव से बोले मुझे नन्द और यशोदा के घर छोड़ आओ श्रीविष्णु की कृपा से कारागार के आस पास जितने द्वारपाल थे सब गहरी निद्रा में सो गए  भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि थी। बुधवार की आधी रात बीत चुकी थी कारागार की वह कोठरी, जिसमें वसुदेव - देवकी कैद थे, प्रकाश से भर उठी परम कृपालु भगवान अपने चतुर्भुज में प्रगट हो गए। भाव विभोर होकर वसुदेव और माता देवकी प्रभु की स्तुति करने लगें। कंस के भय से त्रस्त माता पिता को भगवान ने आश्वस्त किया। माता के कहने पर वे अपना चतुर्भुज रूप त्याग कर शिशु रूप में परिवर्तित हो गए वसुदेव से बोले आप मुझे गोकुल में नन्द जी के यहां पहुंचा दे और उनकी पत्नी यशोदा जी की नवजात पुत्री को यहां ले आये 

भगवान कि योगमाया के प्रभाव से वसुदेव जी की हथकड़ी बेड़ी खुल चुकी थी। कारागार के रक्षक गहरी निद्रा के वशीभूत हो गए थे। वसुदेव ने एक सूप में भगवान के उस शिशु रूप को रखा और उन्हें सिर पर उठाकर वे गोकुल की ओर चल पड़े। यमुना जी ने प्रभु चरणों का स्पर्श कर उन्हें रास्ता दिया। शेषनाग जी अपने फनों का छाता फैलाए मूसलाधार वर्षा से शिशु की रक्षा करने लगे।

योगमाया के प्रभाव से माता यशोदा भी अपने तत्काल उत्पन्न पुत्री से अनभिज्ञ गहरी निद्रा में थीं। शिशु रूप प्रभु को उनके समीप सुलाकर और उनकी कन्या को लेकर वसुदेव जी वापस मथुरा लौट आए। उनके कारागार में पहुंचते ही योगमाया का प्रभाव लुप्त हो गया पुनः देवकी वसुदेव हथकड़ियों और बेड़ियों में बंध गए। कन्या शिशु रुदन करने लगी। कारागार रक्षक जग गए और उन्होंने कंस से देवकी के पुत्र जन्म लेने का समाचार सुना दिया कारागार रक्षकों से देवकी के आठवां पुत्र जन्म लेने का समाचार सुनकर कंस दौड़कर वहां पहुंचा माता देवकी ने बिलखकर बोली भइया यह तो लड़की है, आप जैसे योद्धा का भला क्या बिगाड़ सकती हैं इसे तो मुझसे मत छीनों कंस भला क्यों मानता कंस देवकी के गोद से उस नन्हीं कन्या को छीन लिया कंस उस कन्या को घुमाकर पटकने जा रहा था कन्या कंस के हाथ से छूट कर आकाश में चली गईं वह भगवान की योगमाया ही थी 

वह चतुर्भुज रूप से आकाश में प्रगट होकर उसने कहा अरे दुष्ट तुझे मारने वाला कहीं और जन्म ले चुका है कंस ने आदेश दिया कि उसके राज्य में जन्म लेने वाले शिशुओं को मार दिया जाय इधर गोकुल में नंदबाबा के यहां शिशु रूप भगवान की लीला प्रारंभ हो गई थी 


Comments

  1. सब भगवान श्रीकृष्ण की माया है 🙏

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  2. जय श्री कृष्णा

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